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नारी

करूँ मैं तेरी महिमा का मंडन, या तेरी वेदना का चित्रण..! बतलाऊँ मैं तेरी क्रूरता, या दिखलाऊँ तेरा समर्पण..!!                     करूँ बखान मैं तेरे गुणों का,                     या अवगुणों की खान दिखाऊँ..!                     करूँ तेरे चरित्र का गान या,                     तेरी अस्मत पर बाण चलाऊँ..!! क्योंकि... नारी है तू नारी है, गांडीव गदा कटारी है..! सबल सशक्त सहज सरल, अबला है और बेचारी है..!! शक्त भी तू है, अशक्त भी तू है..! क्षण क्षण में व्यक्त भी तू है..!! ताज भी तू है, तख्त भी तू है..! हाड़ माँस और रक्त भी तू है..!! बाग बाग में कूजित तू है..! वेदों में सम्प...