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नारी

करूँ मैं तेरी महिमा का मंडन, या तेरी वेदना का चित्रण..! बतलाऊँ मैं तेरी क्रूरता, या दिखलाऊँ तेरा समर्पण..!!                     करूँ बखान मैं तेरे गुणों का,                     या अवगुणों की खान दिखाऊँ..!                     करूँ तेरे चरित्र का गान या,                     तेरी अस्मत पर बाण चलाऊँ..!! क्योंकि... नारी है तू नारी है, गांडीव गदा कटारी है..! सबल सशक्त सहज सरल, अबला है और बेचारी है..!! शक्त भी तू है, अशक्त भी तू है..! क्षण क्षण में व्यक्त भी तू है..!! ताज भी तू है, तख्त भी तू है..! हाड़ माँस और रक्त भी तू है..!! बाग बाग में कूजित तू है..! वेदों में सम्प...

अखंडता में एकता

                      प्रभात की कलम से जान जाये तो जाये पर प्राण नहीं मिट जाये हम भले पर मान नहीं सारी दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं ऐसा रूप नहीं ऐसा भेष नहीं जान जाये..............................। उत्तर में हिमाला बड़ी शान से खड़ा दक्षिण में है सागर इसके पाँव में पड़ा गंगा जमुना जैसी नदियाँ यहाँ काश्मीर के जैसी वादियाँ हैं यहाँ रेगिस्तान हो पहाड़ या पठार जितने नदी घाटियाँ हों समतल मैदान जितने मेरे देश की अखंडता है सबसे अटूट इसकी एकता में पड़ेगी कभी न कोई फूट मेरे देश सा महान संसार में नहीं जान जाये तो जाये पर आन नहीं जान जाये ...............................। रूक जाये जो कभी वो तूफान नहीं झुक जाये जो कभी वो आसमान नहीं गिर जाये जो कभी वो ईमान नहीं बिक जाये जो कभी वो इंसान नहीं कट जाये जो कभी वो कोई तान नहीं मिट जाये जो कभी वो हिन्दुस्तान नहीं जान जाये तो जाये पर आन नहीं जान जाये  ................................। हर धर्म जातियाँ हर भाषा बोलियाँ सब मिलके रहें सब मिलके कहें...

Rakshabandhan

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A poem written by me depicting my life till now and the role of my sisters in nurturing and shaping it.....   #Rakshabandhan #missing #love राखी त्योहार नही सिर्फ धागों का ये तो पर्व है कुछ वादों का कुछ भूल बिसरी यादों का.... कई मन्नतों के बाद मुझको पाया था मेरी बहनों की राखी ने मुझे जहाँ में बुलाया था मैं था नन्हा सा नटखट चंचल सुंदर सौम्य सलोना उन सब के लिये तो था मैं एक अनमोल खिलौना बचपन का वो प्यार,  जब हँसी ठिठोली करते थे वो मीठी सी तकरार,  जब हँसते लड़ते रोते थे प्रेम का वो दरिया जिसमें मैं डूबा रहता था ममता की वो छाँव जिसमें मैं सोया करता था सुबह से शाम, शाम से सुबह ना जाने कैसे होती थी मुझे कुछ हो जाये तो मेरी बहनें ज्यादा रोती थी मेरी कामयाबियों की खुशी मुझसे ज्यादा सबको होती थी हर दिन हर पल भर भर के मुझको दुआयें देती थी रोज नया "प्रभात" बन,  मैं चढ़ता गया नये शिखर पर रिश्तों की वो गर्माहट तो जाती थी हर रोज बिखर मैं सही और सब गलत,  इसी गुमान में जीने लगा था मैं प्यारे खून के रिश्तों को भी कहीं पीछे छोड़ने लगा था मैं ...

ai watan mere tujhe dilo jaan se chaha hai

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 प्रभात की कलम से  नाम  जब भी वतन  का आता है, खुद पे ही गुमान हो जाता है नाज़ है कि हम हिंदुस्तानी हैं, और वतन ये हिन्दोस्ताँ हमारा है ऐ वतन मेरे तुझे दिलोजान  से चाहा है           ऐ  वतन मेरे तुझे दिलोजान से चाहा है जितना सोचा था उससे कहीं बढ़के पाया है           ऐ वतन मेरे तुझे दिलोजान से चाहा है तुझ संग ही तो खेली मैंने पहली ये होली          सबसे पहले खायी तेरी मिट्टी की गोली उस मिट्टी संग तू भी मेरे दिल में समाया है           ऐ वतन मेरे तुझे दिलोजान से चाहा है तेरी जमीं में ही बिता है मेरा ये बचपन           तुझ से ही तो पूरे हुए सब मेरे ये सुख स्वप्न ऐसा लगता है जैसे तू मेरा साया है           ऐ वतन मेरे तुझे दिलोजान से चाहा है तुझसे ही तो सीखी मैंने जीवन की हर बात          इतना काबिल तूने बनाया दे दूँ सबको मात शक्ति बनकर तू ही मेरे मन में समाया है ...

Vande Mataram

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प्रभात की कलम से   वन्दे मातरम बोलो वन्दे मातरम  जय हिन्द जय हिन्द  वन्दे मातरम  वन्दे मातरम से गूंजे जग सारा  वन्दे मातरम है देश का सहारा  वन्दे मातरम पे हमको नाज़ है  वन्दे मातरम मेरे देश की आवाज़ है  वन्दे मातरम मेरे देश की आवाज़ है  व  कहे विश्व में अकेला हूँ खड़ा  दुश्मनो की राह में शूल सा पड़ा  न  कहे नाज़ हमे अपने वतन पे  इसकी सरजमीं और इसके चमन पे  द  से है दिल जिसमे दम्भ है भरा  हिन्दुस्तानी होने का गर्व है बड़ा  माँ से भी प्यारी मातृभूमि है मेरी  मेरी आत्मा और काया है मेरी  म  कहे विश्व से मत कर इतना गुरूर  तकनीक के नशे में मत हो तू इतना चूर  चाहें तो बता दें तुझे क्या तेरी औकात है  मेरे सामने तेरी क्या बिसात है  त  कहे तरंगो में घुली एकता  प्रेम और सद्भाव की यहाँ बहे सरिता  र  कहे रोको ना मुझे पानी हर मंजिल  चाहे जाये जान चाहे टूटे मेरा दिल  म  से है मातृभूमि जिसको मेरा प्रणाम  इसकी सुरक्ष...

Charno me bitha lo maa

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            प्रभात की कलम से   चरणों में बिठा लो माँ , मेरा जन्म सफल कर दो        अपनी पावनता से मेरा मन उज्जवल कर दो   हर साँस में महके माँ , तेरे नाम का बस चन्दन       चाहो तो मिटा दो माँ , जन्मों का हर बंधन  भूलूँ नहीं नाम तेरा, संकल्प अटल कर दो       अपनी पावनता से मेरा ----------------.   हर प्राणी मुस्काये , सब तेरे ही गुण गाये       हर एक वीराना भी , बन साँस तेरी जाये  सबके जीवन में माँ, तुम चहल पहल कर दो       अपनी पावनता से मेरा ---------------.  राहें हैं बहुत लम्बी , ,कहीं मैं ना खो जाऊँ      सागर है बहुत गहरा , कहीं मैं न डुबक जाऊँ  हम सब हैं तेरी छाँव में, सही मार्ग दिखा दो माँ        चरणों में बिठा लो माँ --------------------.