अखंडता में एकता
प्रभात की कलम से जान जाये तो जाये पर प्राण नहीं मिट जाये हम भले पर मान नहीं सारी दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं ऐसा रूप नहीं ऐसा भेष नहीं जान जाये..............................। उत्तर में हिमाला बड़ी शान से खड़ा दक्षिण में है सागर इसके पाँव में पड़ा गंगा जमुना जैसी नदियाँ यहाँ काश्मीर के जैसी वादियाँ हैं यहाँ रेगिस्तान हो पहाड़ या पठार जितने नदी घाटियाँ हों समतल मैदान जितने मेरे देश की अखंडता है सबसे अटूट इसकी एकता में पड़ेगी कभी न कोई फूट मेरे देश सा महान संसार में नहीं जान जाये तो जाये पर आन नहीं जान जाये ...............................। रूक जाये जो कभी वो तूफान नहीं झुक जाये जो कभी वो आसमान नहीं गिर जाये जो कभी वो ईमान नहीं बिक जाये जो कभी वो इंसान नहीं कट जाये जो कभी वो कोई तान नहीं मिट जाये जो कभी वो हिन्दुस्तान नहीं जान जाये तो जाये पर आन नहीं जान जाये ................................। हर धर्म जातियाँ हर भाषा बोलियाँ सब मिलके रहें सब मिलके कहें...