Posts

Showing posts from September, 2018

अखंडता में एकता

                      प्रभात की कलम से जान जाये तो जाये पर प्राण नहीं मिट जाये हम भले पर मान नहीं सारी दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं ऐसा रूप नहीं ऐसा भेष नहीं जान जाये..............................। उत्तर में हिमाला बड़ी शान से खड़ा दक्षिण में है सागर इसके पाँव में पड़ा गंगा जमुना जैसी नदियाँ यहाँ काश्मीर के जैसी वादियाँ हैं यहाँ रेगिस्तान हो पहाड़ या पठार जितने नदी घाटियाँ हों समतल मैदान जितने मेरे देश की अखंडता है सबसे अटूट इसकी एकता में पड़ेगी कभी न कोई फूट मेरे देश सा महान संसार में नहीं जान जाये तो जाये पर आन नहीं जान जाये ...............................। रूक जाये जो कभी वो तूफान नहीं झुक जाये जो कभी वो आसमान नहीं गिर जाये जो कभी वो ईमान नहीं बिक जाये जो कभी वो इंसान नहीं कट जाये जो कभी वो कोई तान नहीं मिट जाये जो कभी वो हिन्दुस्तान नहीं जान जाये तो जाये पर आन नहीं जान जाये  ................................। हर धर्म जातियाँ हर भाषा बोलियाँ सब मिलके रहें सब मिलके कहें...

Rakshabandhan

Image
A poem written by me depicting my life till now and the role of my sisters in nurturing and shaping it.....   #Rakshabandhan #missing #love राखी त्योहार नही सिर्फ धागों का ये तो पर्व है कुछ वादों का कुछ भूल बिसरी यादों का.... कई मन्नतों के बाद मुझको पाया था मेरी बहनों की राखी ने मुझे जहाँ में बुलाया था मैं था नन्हा सा नटखट चंचल सुंदर सौम्य सलोना उन सब के लिये तो था मैं एक अनमोल खिलौना बचपन का वो प्यार,  जब हँसी ठिठोली करते थे वो मीठी सी तकरार,  जब हँसते लड़ते रोते थे प्रेम का वो दरिया जिसमें मैं डूबा रहता था ममता की वो छाँव जिसमें मैं सोया करता था सुबह से शाम, शाम से सुबह ना जाने कैसे होती थी मुझे कुछ हो जाये तो मेरी बहनें ज्यादा रोती थी मेरी कामयाबियों की खुशी मुझसे ज्यादा सबको होती थी हर दिन हर पल भर भर के मुझको दुआयें देती थी रोज नया "प्रभात" बन,  मैं चढ़ता गया नये शिखर पर रिश्तों की वो गर्माहट तो जाती थी हर रोज बिखर मैं सही और सब गलत,  इसी गुमान में जीने लगा था मैं प्यारे खून के रिश्तों को भी कहीं पीछे छोड़ने लगा था मैं ...